पशु पक्षी भी मनुष्य की तरह ही आपस में वार्तालाप करते है और एक दूसरे तो संकेत देते है। परन्तु इनकी आवाज को भाषा की मान्यता नहीं दी गयी है क्योंकि हम पशु पक्षी की आवाज को समझ नहीं पाते। इसीलिए पशु पक्षी की आवाज़ को बोली कहा जाता है।
पक्षियों की आवाज़ :
मोर | कुहकना |
तोता | टैं-टैं करना, टॉय टॉय करना |
कबूतर | गुटरगूं करना |
चिड़िया | चहचहाना, चहकना |
कोयल | कूकना |
कौआ | काँव काँव करना |
सारस | क्रें क्रें करना |
बतख | कां कां करना |
मुर्गा | कुकड़ू कू करना |
टिटहरी | टीं टीं करना |
पशुओं की आवाज़ :
गाय, भैंस | रँभाना |
कुत्ता | भौकना |
बिल्ली | म्याऊं म्याऊं करना |
बन्दर | किलकारना |
ऊंट | बलबलाना |
हाथी | चिंघाड़ना |
घोड़ा | हिनहिनाना |
गधा | रेंकना |
रीछ, भालू | गुर्राना |
सिंह | दहाड़ना |
बाघ | गरजना, गुर्राना |
खरगोश | किकियाना |
भेड़, बकरी | मिमियाना |
चूहा | चरचराहट करना |
गीदड़ | हूँआना, रोना |
भेड़िया | चीखना |
छछूंदर | छुछुआना |
गेंडा | फुंफूंनना |
सूअर | चिचयाना |
मेंढक | टरटराना |
साँप, नाग | फुफकारना |
दरियाई घोड़ा | गड़गड़ाना |
मगरमच्छ | घुरघुराना |
साल दर साल पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है। पहले तो हमें हमारे आस-पास कई सारे पक्षी दीखते थे। हमें इन्हे बचाने के प्रयत्न करने चाहिये। दाना पानी के अभाव में पक्षियों की संख्या काम होती जा रहा है। हमें पक्षियों के सरंक्षण के प्रयत्न करने चाहिये। आजकल काफी लोग अपने घर की छत व बालकोनियों में पक्षियों के लिए दाना पानी रखने लगे है जो कि पक्षियों को बचने का काफी सार्थक कदम है।
इस पोस्ट को लिखने के पीछे मेरा एक कारण यह भी है, मैं उन महानुभावों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जो पशु – पक्षियों के सरंक्षण में अपना अमूल्य योगदान दे रहे है।
पशु – पक्षियों के संरक्षण के लिए हम क्या कर सकते है ?
- पशुओं के लिए अपने घर / अपार्टमेंट के बाहर पानी पीने की कुण्डी रखें व नियमित रूप से उसे भरें
- अपने घर की छत व बालकनी में पक्षियों के दाना पानी की व्यवस्था करे व उन्हें नियमित रूप से भरें
- हमें ऐसे पेड़ उगाने चाहिये जिससे पक्षियों को फल व खाना मिलता है
ऐसे छोटे छोटे प्रयास कर हम इन निरीह प्राणियों को बचा सकते है।