Category Archives: आरती संग्रह

कर्पूर गौरम करूणावतारम (कपूर आरती)

कर्पूर गौरम करूणावतारम संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |सदा वसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नमामि || मंगलम भगवान् विष्णु मंगलम गरुड़ध्वजः |मंगलम पुन्डरी काक्षो मंगलायतनो हरि || सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके |शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते || त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधू च सखा त्वमेवत्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव

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महालक्ष्मी जी की आरती

महालक्ष्मी जी की आरती ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता ॥ ॐ जय … उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता । सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय … दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥ ॐ

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सीता माता की आरती

आरती श्री जनक दुलारी की।सीता जी रघुवर प्यारी की॥ जगत जननी जग की विस्तारिणी,नित्य सत्य साकेत विहारिणी,परम दयामयी दिनोधारिणी,सीता मैया भक्तन हितकारी की॥ आरती श्री जनक दुलारी की।सीता जी रघुवर प्यारी की॥ सती श्रोमणि पति हित कारिणी,पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,त्याग धर्म मूर्ति धरी की॥ आरती श्री जनक दुलारी की।सीता

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जगदीश भगवान की आरती

ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे । भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट क्षण में दूर करे ।। ॐ जय… जो ध्यावे फल पावे दुःखबिन से मन का स्वामी दुःखबिन से मन का सुख सम्पति घर आवे सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का ।। ॐ जय… मात पिता तुम

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शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा। एकानन चतुरानन पंचांनन राजे। हंसासंन ,गरुड़ासन ,वृषवाहन साजे।।ॐ जय… दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें।।ॐ जय… अक्षमाला ,बनमाला ,रुण्ड़मालाधारी | चंदन , मृदमग सोहें, भाले शशिधारी।।ॐ जय… श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें सनकादिक, ब्रम्हादिक ,भूतादिक संगें।।ॐ जय… कर के मध्य

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अम्बा माताजी की आरती

जय अम्बे गौरी मैया, जय श्यामा गौरी। निशदिन तुमको ध्यावत , हरि ब्रह्म शिवजी।। जय अम्बे गौरी… मांग सिंदूर बिराजत, टिको मृगमद को। उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन निको।। जय अम्बे गौरी… कनक सामान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजे।। जय अम्बे गौरी… केहरी वहां रजत , खड्ग खप्पर धरी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत तिनके

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रामायण जी की आरती

आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिया-पी की।। गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद, बालमीक विज्ञान विशारद। शुक सनकादि शेष अरु शारद, बरनि पवनसुत कीरति नीकी।। आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिया-पी की।। गावत वेद पुरान अष्टदस, छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस। मुनि-मन धन सन्तन को सरबस, सार अंश सम्मत सबही

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हनुमानजी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके। अंजनि पुत्र महा बलदाई, सन्तन के प्रभु सदा सहाई।। आरती कीजै दे बीरा रघुनाथ पठाए, लंका जारि सिया सुधि लाए। लंका सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई।। लंका जारि असुर संहारे,

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श्री शनिदेव जी की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी।। जय जय… श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी। निलाम्बर धार नाथ गज की असवारी।। जय जय… क्रीट मुकुट शीश सहज दिपत है लिलारी। मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी।। जय जय… मोदक और मिष्ठान चढ़े, चढ़ती पान सुपारी। लोहा, तिल, तेल, उड़द महिषी है

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कुंजबिहारी जी की आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की।। श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की। आरती… कनकमय मोर मुकुट बिलसै,

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