Category Archives: भारतीय काल गणना

भारतीय काल गणना : संवत्सर

भारतीय संस्कृति में हर उत्सव, व्रत, पर्व अथवा त्यौहार को करने का एक नियत समय होता है। भारतीय काल गणना से ही हमें व्रत उत्सव का ज्ञान होता है। भारतीय काल गणना सर्वथा वैज्ञानिकता है। आइये जानते है भारतीय काल गणना के परिपेक्ष्य में संवत्सर क्या होता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को नव

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तिथियों के नियम क्या कहते है : भारतीय काल गणना

तिथियों के नियम के सन्दर्भ में श्रुति में आया है कि दोपहर के पूर्व का समय देवो का होता है, मध्यान्ह ( दोपहर) वाला मनुष्यों का होता है तथा अपरान्ह वाला समय पितरों का होता है।मनु में वर्णित है कि ” प्रातःकाल व्यक्ति को निम्न कर्त्तव्य करने चाहिए : शरीर की शुद्धि, दन्त धावन, स्नान,

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तिथि क्या होती है

चंद्रमा के एक दिन को तिथि कहते है। जैसे प्रतिपदा (एकम), द्वितीया, चतुर्थी, एकादशी, अमवस्या, पूर्णिमा आदि । सूर्य से 12 अंश की दूरी तक जाने में जो समय चंद्र को लगता है वो अवधि तिथि कहलाती है। सूर्य सिद्धान्त के अनुसार ” तिथि चान्द्र दिन है, जब अमावस्या के अंतिम क्षण पर चन्द्र सूर्य

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